ⓘ मधुबनी चित्रकला

मिथिला चित्रकला

मिथिला चित्रकला मिथिला क्षेत्रमे बनाएवाला एक विशिष्ठ चित्रकला अछि। एकर इतिहास कमसे कम आठ सौ सालसे अधिक छनि। मिथिला चित्रकला मधुवनी चित्रकलाक नामसे परिचित थिक । एकर श्रिजण केर जिवन्तता मैथिल नारी सब देने छथिन ।एहि मे लौकिक पारलौकिक सम्बन्ध पर आधाारित बहुतेको स्थान मे पाबनि तिहार मे आकृति बनावल जाइत अछि।

मधुबनी, भारत

मधुबनीक मुख्य भाषा मैथिली अछि जे सुनऽ मे मधुर आ सरस अछि। पहिलुका समयमे एतयके जङ्गलमे मौध शहद बेसी भेटैत छल ताहि लेल जगह का नाम मधु + वनी सँ मधुबनी भऽ गेल। किछ लोकक मानब छै मधुबनी शब्द मधुर + वाणी सँ विकसित भेल अछि।

मखान

मखान पोषक तत्वसभ सँ भरपुर एक जलीय उत्पाद छी जे तालाब, पोखरि, दलदली क्षेत्रक शान्त पानिमे होएत अछि। मखानक बीयाकें तरि एकर उपयोग मिठाई, नमकीन, खीर आदि बनाबैक लेल कएल जाएत अछि। मखानमे ९.७% सहज सँ पचबैवला प्रोटीन, ७६% कार्बोहाइड्रेट, १२.८% नमी, ०.१% वसा, ०.५% खनिज लवण, ०.९% फस्फोरस आ प्रति १०० ग्राम १.४ मिलीग्राम लौह पदार्थ विद्यमान रहैत अछि। एहिमे औषधीय गुण सेहो होएत अछि।

विदेह सम्मान

विदेह सम्मान विदेह पत्रिका द्वारा देबए बला वार्षिक सम्मान अछि जकरा समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान सेहो कहल जाइत छै। विदेह सम्मान मात्र साहित्य लेल नै बल्कि हरेक प्रकारक कला जेना नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला लेल सेहो देल जाइत छै

प्रवीण कुमार ठाकुर

प्रवीण कुमार ठाकुर जन्म तिथि -31 दिसम्बर 1977; जन्म स्थान -कन्हौली, सकरी, मधुबनी ; शिक्षा- सूर्य नारायण हाई स्कूल - नरपतिनगर, बी. एस. सी - मेमोरिअल कॉलेज - दरभंगा, डिप्लोमा इन फैशन डिजाईन नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन डिजाईन - नयी दिल्ली, चित्रकला आओर फैशन पूर्वानुमानमे विशेष योग्यता, निवास स्थान- दिल्ली, इंडिया; पिता- श्री सत्य नारायण ठाकुर, सकरी - कन्हौली ; माता- श्रीमती मालती ठाकुर, सकरी - कन्हौली । वर्तमानमे अपन एक्सपोर्ट बिज़नस एस्थेट) क नामसँ शुरुआत, पूर्वमे प्रोडक्ट डेवेलोप्मेंट आओर मर्चंटक रूपमे कार्यरत।

दड़िभङ्गा

दड़िभङ्गा बिहार राज्यक एक शहर आ नगर निगम छी । ई दड़िभङ्गा जिला आ दड़िभङ्गा क्षेत्रक मुख्यालय छी । दड़िभङ्गा बिहारक पाँचम पैग शहर आ सभसँ तेजीसँ बढि रहल नगर छी । दड़िभङ्गा बिहारक दोसर सभसँ पैग चिकित्सा क्षेत्र छी । ऐतिहासिक रूपसँ ई शहर दड़िभङ्गा राजक दरबारस्थल छल ।

                                     

ⓘ मधुबनी चित्रकला

मधुबनी चित्रकला या मिथिला पेंटिंग मिथिलाञ्चल क्षेत्र जेना बिहारक दरभंगा, मधुबनी एवम नेपालक कुछ क्षेत्रक प्रमुख चित्रकलाछी । प्रारम्भमे रङ्गोलीक रुपमे रहैक बाद ई कला धिरे-धिरे आधुनिक रूपमे कपडा, दिवार एवम कागज पर उतैर गेल । मिथिला महिलासभद्वारा शुरू कएल गेल घरेलु चित्रकलाक पुरुषसभ सेहो अपना लेने अछि ।

                                     

1. इतिहास

मानल जाइत अछि ई चित्र राजा जनक राम-सीताक विवाहक दौरान महिला कलाकारसभसँ बनबेने छल । आई मिथिलाञ्चलक बहुत गामसभक महिलासभ इ कलामे दक्ष अछि । अपन असलि रूपमे त ई पेन्टिङ गामसभक माइटसँ लेपल गेल बस्तीसभमे देख भेटैत छल, लेकिन एहिकइ आब कपडा आ पेपर खुब बनाएल जाइत अछि । समयक साथ साथ चित्रकारक एहि विधामे पासवान जातिक समुदायक लोगसभद्वारा राजा शैलेशक जिवन वृतान्तक चित्रण सेहो कर जाए लागल । एहि समुदायक लोग राजा सैलेशक अपन देवताक रूपमे पुजा सेहो कर लागल ।

                                     

2. विशेषता

एहि चित्रमे खासकक कुल देवताक सेहो चित्रण होएत अछि । हिन्दु देव-देवताक तस्विर, प्राकृतिक नजारा जेना-सूर्य आ चन्द्रमा, धार्मिक गाछ-वृक्ष जेना-तुलसी आर विवाहक दृश्य देखला भेटत । मधुबनी पेन्टिङ दुई किसिमक होएत- भितर चित्आर अरिपन या अल्पना ।

                                     

3. विधिसभ

चटख रङ्गक इस्तमाल खुब कएल जाइत अछि । जेना गाढा लाल रङ्ग, हरियर,बुल्लु आर करिया । कुछ हल्का रङ्गसँ सेहो चित्रमे निखार आनल जाइत अछि, जेना-पियर, गुलाबि आ नेबो रङ्ग । ई जाएनक परेशान हेबै कि ई रङ्गक घरेलु समानसँ बनाएल जाइत अछि, जेना-हरदि, केलाक पता, लाल रङ्गक लेल पिपलक छाल प्रयोग कएल जाइत अछि । आर दुध। भितरक चित्रक अलावा अल्पनाक सेहो बिहारमे बहुत चलन अछि । एहिक बैठक या दरबाजावक बाहर बनाएल जाइत अछि । पहिले एकरा एहिद्वारे बनाएल जाइत छल ताकि खेतमे बालीक उब्जाउ बढियासँ होए मुदा आइकाइल एकरा घरक शुभ काममे बनाएल जाइत अछि । चित्र बनाबक लेल सलाईक काठी आ बासक कलमक प्रयोगमे आनल जाइत अछि । रङ्गक पकर बनाबक लेल बबुलक वृक्षक लस्साक मिलाएल जाइत अछि ।

समयक साथ मधुबनी चित्रक बनाबक पाछुक मतलब सेहो बदल गेल अछि, मुदा ई कला अपनामे एते चिज समटने अछि कि ई आइयो कलाक कद्रदानक पहिल पसन्दमेसँ अछि ।

                                     

3.1. विधिसभ हातसँ निर्माण पेपर

चित्रणसँ पूर्व हातसँ निर्माण कागजक तैयार करक लेल कागज पर गाईक गोबरक झोर बनाक तथा एहिमे बबुलक लस्सा देल जाइत अछि । सुती कपडासँ गोबरक झोरक कागज पर लगाएल जाइत अछि आ रौदमे सुखाबक लेल राएख देल जाइत अछि ।

                                     

4. प्रकार

मधुबनी चित्रकला देवाल, केन्वास एवम हातसँ निर्माण कागज पर वर्तमान समयमे चित्रकारसभद्वारा बनाएल जाइत अछि ।

भितर चित्र

मधुबनी भितर चित्र मे माइट चिकनी आ गाईक गोबरक मिश्रणमे बबुलक लस्सा मिलाक देवाल पर निपल जाइत अछि । गाईक गोबरमे एक खास तरहक रसायन पदार्थ होएक कारण देवाल पर विशेष चमक आइब जाइत अछि । एकरा घरक तिन खास जगह पर बनाबक परम्परा अछि, जेना- पुजास्थान, कोहबर कक्ष विवाहितक कक्षमे आर विवाह या कोनो खास उत्सव पर घरक बाहरि देवाल पर। मधुबनी पेन्टिङमे जेहि देवी-देवताक चित्रण कएल जाइत अछि, उ अछि- मा दुर्गा, काली, सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती, गौरी-गणेश आर विष्णुक दस अवतार इत्यादि। इ तस्विरक अलावा बहुत प्राकृतिक आर रम्य नजाराक सेहो पेन्टिङ बनाएल जाइत अछि। पशु-पक्षी, वृक्ष, फुल-पात आदिक स्वस्तिकक निशानिक साथ सजाएल-सवारल जाइत अछि ।

                                     
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  • System of Classification of Flowering Plants. New York: Columbia University Press. प 111. आइएसब एन 0 - 231 - 03880 - 1. म थ ल मध बन च त रकल दरभ ग म थ ल
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महासुन्दरी देवी

महासुन्दरी देवी एक प्रसिद्ध भारतीय कलाकार आ मिथिला चित्रकार छल, जिनका भारतक राज्य आ राष्ट्रिय दुनु द्वारा पुरस्कार प्रदान कएल गेछल आ १९९५ मे हिनका मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तुलसी सम्मान सँ सेहो सम्मानित कएल गेल छल, आ २०११ मे हिनका भारत सरकारक दिससँ पद्म श्री पुरस्कार देल गेछल । ४ जुलाई २०१३ कऽ ९१ वर्षक उमरमे हिनकर निधन भेछल ।