ⓘ गङ्गा नदी

त्रिशूली नदी

त्रिशूली नदी नेपालक एक मुख्य नदी तथा सप्तगण्डकी नदी प्रणालीएक मुख्य सहायक नदी छी । ई नदी रसुवाक गोसाईकुण्ड स्थित त्रिशूलधारासँ उत्पत्ति भेल नदी छी । भगवान शिव कालकूट बिष शेवन करि तपस्या करैलेल पहुँचला बाद अप्पन त्रिशूल भोकि पानि निकाललक कहि ई ठाम त्रिशूलधारा नामसँ प्रसिद्ध अछि । त्रिशूली नदीके त्रिशूली गङ्गा सहो कहल जाइत अछि । त्रिशूली नेपालक मध्य भागसँ बहैवला नदी छी । ई नारायणी वा गण्डकी नदी जलाधार क्षेत्रक एक प्रमुख नदी छी ।

भागीरथी नदी

भागीरथी भारतक एक नदी छी । ई उत्तराखण्डसँ प्रवाहित होइत अछि आ देवप्रयागमे अलकनन्दासँ मिल गङ्गा नदीक निर्माण करैत अछि । भागीरथी गोमुख स्थानसँ २५ किलोमिटर लम्बा गङ्गोत्री हिमनदीसँ निकलैत अछि । भागीरथी आ अलकनन्दा देव प्रयाग सङ्गम करैत अछि जकर पश्चात ओ गङ्गाक रुपमे पहचानल जाइत अछि ।

कोशी नदी

कोशी नदी नेपालक सबसँ पैग नदी छी । कोशी नदी चीनक ह्वाङ्हो नदी बाद तीव्र गतिमे प्रवाहित होमएवला विश्वक दोसर पैग नदी छी । एकर सहायक नदीसभमे अरूण, तमोर, सुनकोशी, भोटेकोशी, लिखु, तामाकोशी, इन्द्रावती पडैत अछि । सातटा मुख्य सहायक नदी मिल बनल भेला कारण एकरा सप्तकोशी सेहो कहल जाइत अछि । हिमालयसँ उत्पत्ति भेल ई सहायक नदीसभ महाभारत पर्वत श्रेणीक निचुल्का भागमे सम्मिश्रित भ सप्तकोशीक रूपमे सुनसरी जिलाक चतरा गल्छीसँ तराईक समथर क्षेत्रमे प्रवेश करैत अछि । नेपालक लौकही आ हनुमाननगर गाविसक बीचमे बनल कोशी बाँध पार करि ई नदी भारत प्रवेश करैत अछि आ भारतक बिहार राज्यक कर्सेला घाटमा गङ्गा नदीमे मिलैत अछि । वर् ...

अलकनन्दा नदी

अलकनन्दा नदी गङ्गाक सहयोगी नदी छी । ई गङ्गाक चार नामसभमे सँ एक छी । चार धामसभमे गङ्गाक बहुतेक रूप आ नाम अछि । गङ्गोत्रीमे गङ्गाक भागीरथीक नामसँ जानल जाइत अछि, केदारनाथमे मन्दाकिनी आ बद्रीनाथमे अलकनन्दा । ई उत्तराखण्डमे शतपथ आ भगीरथ खड़क नामक हिमनदीसँ निकलैत अछि । ई स्थान गङ्गोत्री कहलावैत अछि । अलकनन्दा नदी घाटीमे लगभग २२९ किमी धरि प्रवाहित होइत अछि । देव प्रयाग या विष्णु प्रयागमे अलकनन्दा आ भागीरथीक सङ्गम होइत अछि आ एकर बाद अलकनन्दा नाम समाप्त भए केवल गङ्गा नाम रहि जाइत अछि । अलकनन्दा चमोली टहेरी आ पौड़ी जिला भ जाइत अछि ।. गङ्गाक पानिमे एकर योगदान भागीरथीसँ अधिक अछि । हिन्दू धर्मावलम्बीसभ ...

दमन

दमन सहरक दमन गङ्गा नदी दुई भागमे बाँटने अछि । पहिल भागक नाम नानी-दमन नानीक अर्थ छोट आ दोसर भागक नाम मोती-दमन मोतीक अर्थ पैग छी । नानी दमनमे दुईटा पैग सहरसभ रहल अछि । नानी दमनमे महत्वपूर्ण केन्द्रिक बजार, प्रमुख अस्पताल, वृहतबजार आ मुख्य सरकारी आ आवाशीय भवनसभ रहल अछि तँ मोती-दमनमे मुख्यतया पुरान सहरक छाप तथा पुरातात्विक स्थलसभ देख सकैत छी ।

महानन्दा नदी

महानन्दा नदी एक नदी छी जे भारतीय राज्य पश्चिम बङ्गाल, बिहार आ बंगलादेश भऽ प्रवाहित होइत अछि । एकर दहिना सहायक नदीसभ, मेची नदी छी जे नेपालक पूर्वी सीमा पश्चिम बङ्गालसँ पृथक करैत अछि आ कन्काई नदी नेपालक भितरसँ प्रवाहित होइत अछि ।

कुम्भ मेला

कुम्भ या कुम्भ मेला हिन्दू धर्मावलम्बीसभक एक प्रमुख तीर्थ आ पावनि छी। ई लगभग १२ वर्षक चक्रमे भारतक चारि नदी प्रयागराज / इलाहाबाद, हरिद्वार, नासिक, आ उज्जैन नदीक किनारमे तीर्थ स्थलसभ पर: मनाओल जाएत अछि, साधकसभक मान्यता अछि कि पइछला गलतिसभक लेल एहि नदिसभमे स्नान करबाएक साधन छी, आ ई पाप कर्मक नाश करैत अछि। खगोल गणनाक अनुसार ई मेला मकर सङ्क्रान्तिक दिनसँ प्रारम्भ होएत अछि, जखन सूर्य आ चन्द्रमा, वृश्चिक राशीमे आ वृहस्पति, मेष राशीमे प्रवेश करैत अछि । मकर सङ्क्रान्तिक होमएबला ई संयोग कऽ "कुम्भ स्नान-योग" कहल जाएत अछि ।

देवप्रयाग

देवप्रयाग भारतक उत्तराखण्ड राज्यमे अवस्थित एक नगर आ प्रसिद्ध तीर्थस्थान छी । ई अलकनन्दा नदी तथा भागीरथी नदीक सङ्गम पर स्थित अछि । याह सङ्गम स्थलक बाद ई नदीके पहिल बेर गङ्गा नदीक नाम सँ जानल जाइत अछि । एतय श्री रघुनाथ जी के मन्दिर अछि, जतय हिन्दू तीर्थयात्री भारतक कोना कोना सँ दर्शन करै लेल आबैत अछि । देवप्रयाग अलकनन्दा आ भागीरथी नदिसभकके सङ्गम पर बैसल अछि । एतय सँ दुनू नदिसभके सम्मिलित धारा गङ्गा कहलाबैत अछि । ई टेहरीसँ १८ माइल दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशामे स्थित अछि । प्राचीन हिन्दू मन्दिरक कारण ई तीर्थस्थानक विशेष महत्व अछि । सङ्गम पर होमएक कारण तीर्थराज प्रयागक स्वरूप एकर नामकरण भेल अछि । ...

इलाहाबाद

इलाहाबाद उत्तर भारतक उत्तर प्रदेशक पूर्वी भागमे स्थित एक नगर तथा इलाहाबाद जिलाक प्रशासनिक मुख्यालय छी। एकर प्राचीन नाम प्रयाग छी। एकरा तीर्थराज सेहो कहल जाएत अछि। हिन्दू मान्यता अनुसार, एतय ब्रह्माद्वारा सृष्टि कार्य पूर्ण भेलाक बाद पहिल यज्ञ कएल गेल छल। हिन्दुसभक सभसँ पैग सम्मेलन महाकुम्भक चार स्थलसभमेसँ एक छी, बाँकी तीन हरिद्वार, उज्जैन तथा नासिक छी। हिन्दू धर्मग्रन्थसभमे वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गङ्गा आ यमुनाक सङ्गममे स्थित अछि। एतय सरस्वती नदी गुप्त रूपसँ सङ्गममे आबि मिल जाएत अछि, अतः ई स्थानकेँ त्रिवेणी सङ्गम कहल जाएत अछि जतय प्रत्येक बारह वर्षमे कुम्भ मेला लगैत अछि। इलाहाबादमे ...

बिहार

बिहार भारतक एक प्रशासनिक राज्य छी। ई राज्यक राजधानी आ सभ सँ पैग शहर पटना छी। बिहारक उत्तरमे नेपाल, पूर्वमे पश्चिम बङ्गाल, पश्चिममे उत्तर प्रदेश आ दक्षिणमे झारखण्ड स्थित अछि। बिहार नामक प्रादुर्भाव सम्भवत: बौद्ध बिहारसभक बिहार शब्द सँ बनल अछि। ई क्षेत्र गङ्गा नदी आ सहायक नदीसभक उपजाऊ मैदानमे बसल अछि।प्राचीन काल में विशाल साम्राज्यक गढ़ रहल ई प्रदेश, वर्तमान में देशक अर्थव्यवस्थाक सब सँ पिछड़ल योगदाता म स एगो अछि सन् 1936 और 2000 म ओडिशा और झारखण्ड के अलग भ गेला सँ ई खेती बाड़ी आ अपन मेधाक दम पर उन्नैत क रहल हाँ। देशक प्रतिष्ठित परीक्षा जेना आई टी आ यूपीएससी सन भीरौहगर परीक्षा मे हरेक बेर एत ...

                                     

ⓘ गङ्गा नदी

गङ्गा नदी वा गङ्गे एसियाक पैग नदीसभमे सँ एक तथा भारत आ बङ्गलादेश भऽ प्रवाहित होमएवाला एक पवित्र हिन्दू नदी छी । करीब २५२५ किलोमिटर लम्बा ई नदी हिमालयक पश्चिमी भागमे अवस्थित भारतक उत्तराखण्डसँ निकैल दक्षिण पूर्वदिस बहैत भारतक उत्तरी समथर भूभाग होइत बङ्गलादेश प्रवेश करैत अछि आ अन्तिममे बङ्गालक खाडीमे जा समुद्रमे मिलैत अछि । ई नदी भारतक एकटा महत्वपूर्ण नदी तथा विश्वक सम्पूर्ण हिन्दू धर्मावलम्बीसभक आस्थाक एकटा केन्द्र छी । नदीमे बहैवाला पानि लगायत अन्य वस्तुसभक मात्राक आधारमे ई नदी विश्वक तेसर स्थानमे वर्गीकृत अछि ।

गङ्गा नदीद्वारा भारतक उत्तराखण्डमे हिमालयसँ भऽ बङ्गालक खाडीक सुन्दरवन धरिक विशाल भूभागकें सिचाई करैत अछि । ई भारतक प्राकृतिक सम्पदा मात्र नै भऽ, आम जनताक भावनात्मक आस्थाक आधार सेहो छी । २,०७१ किलोमिटरधरि भारत तथा बंगलादेशमे अपन लम्बा यात्रा तय करैत ई सहायक नदीसभक संगे दस लाख वर्ग किलोमिटर क्षेत्रफलक अति विशाल उब्जाउ मैदानक रचना करैत अछि । सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक आ आर्थिक दृष्टिसँ अत्यन्त महत्त्वपूर्ण गङ्गाक ई मैदान अपन बेसीतर जनसङ्ख्याक कारण सेहो चिन्हल जाइत अछि । १०० फिट ३१ मीक अधिकतम गहिराई भेल ई नदी भारतमे पवित्र मानल जाइत अछि तथा एकर उपासना माता आ देवीक रूपमे कएल जाइत अछि । भारतीय पुराण आ साहित्यमे अपन सौन्दर्य आ महत्वक कारण बारम्बार आदरक साथ गङ्गा नदीकें प्रति विदेशी साहित्यमे सेहो प्रशंसा आ भावुकतापूर्ण वर्णन कएल गेल अछि ।

ई नदीमे माछ तथा सर्पसभक अनेक प्रजाति तँ पाबल जाइते अछि एकर अलावा मिठगर पानिक दुर्लभ डल्फिन सेहो भेटल अछि । ई कृषि, पर्यटन, साहसिक खेलसभ तथा उद्योगसभक विकासमे महत्त्वपूर्ण योगदान दैत अछि तथा अपन तटमे बैसल शहरसभकें जल आपूर्ति सेहो करैत अछि । एकर तटमे विकसित धार्मिक स्थल आ तीर्थ भारतीय सामाजिक व्यवस्थाक विशेष अङ्ग छी । एकर उपर बनल पुल, बाँध, नदी परियोजनासभ भारतक बिजली, पानि आ कृषिसँ सम्बन्धित आवश्यकताकें आपूर्ति करैत अछि । वैज्ञानिकसभ कहैत अछि कि ई नदीक पानिमे ब्याक्टिरिइफेज नामक विषाणु होइत अछि जाहिद्वारा जीवाणुसभ आ अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवसभकें जीवित नै रहैलेल देत अछि । गङ्गाक ई असीमित शुद्धीकरण क्षमता आ सामाजिक श्रद्धा रहला बादो एकर प्रदूषण रोकल नै जा सकल अछि । एकर पानिकें सफा करैलेल विभिन्न प्रयत्न जारी अछि मुदा सफाईकें अनेक परियोजनाक क्रममे नवम्बर, सन् २००८मे भारत सरकारद्वारा एकरा भारतक राष्ट्रिय नदीक रूपमे घोषणा केनए अछि ।

                                     

1. उद्गम

गङ्गा नदीक मुख्य शाखा भागीरथी छी जे कुमायूँमे हिमालयक गोमुख नामक स्थानमे गङ्गोत्री हिमतालसँ प्रवाहित होइत अछि । गङ्गाक ई उद्गम स्थलक उचाई ३१४० मिटर अछि । एहि ठाम गङ्गाकें समर्पित एकटा मन्दिर सेहो अछि । गङ्गोत्री तीर्थ, शहरसँ १९ किलोमिटर उत्तर तरफक ३,८९२ मिटर १२,७७० फिटक उचाईमे ई हिमतालक उद्गम अछि । ई हिमताल २५ किलोमिटर लम्बा आ ४ किलोमिटर चौडा आ लगभग ४० मिटर उंच अछि । ई हिमतालसँ भागीरथी एकटा छोट गुफा जका मुखमे अवतरित होइत अछि । एकर जलस्रोत ५००० मिटर उचाईमे अवस्थित एक बेसिन अछि । ई बेसिनकें मूल पश्चिमी ढलानक सन्तोपन्थक शिखरमे अछि । गौमुखक रस्तामे ३,६०० मिटरकें उचाईमे अवस्थित चिरबासा गाउँमे विशाल गोमुख हिमतालक दर्शन होइत अछि । ई हिमतालमे नन्दा देवी, कामत पर्वत तथा त्रिशुल पर्वतक बरफ पिघैल आबैत अछि । यद्यपि गङ्गाक आकार लेबक लेल अनेक छोट धारासभक योगदान अछि मुदा ६ पैग आ ओकर सहायक ५ छोट धारासभक भौगोलिक आ सांस्कृतिक महत्त्व प्रबल अछि । अलकनन्दाक सहायक नदी धौली, विष्णु गङ्गा तथा मन्दाकिनी छी । धौली गङ्गाक अलकनन्दासँ विष्णु प्रयागमे मिलन होइत अछि । ई १,३७२ मिटरक उचाईमे अवस्थित अछि । याह प्रकार २,८०५ मिटर उंच नन्द प्रयागमे अलकनन्दाक नन्दाकिनी नदीसँ सङ्गम होइत अछि । एकरबाद कर्ण प्रयागमे अलकनन्दाक कर्ण गङ्गा वा पिन्डर नदीसँ सङ्गम होइत अछि । फेर ऋषिकेशसँ १३९ किलोमिटर दुर अवस्थित रुद्र प्रयागमे अलकनन्दा मन्दाकिनी नदीसँ मिलैत अछि। एकरबाद भागीरथी आ अलकनन्दा १,५०० फिटमे अवस्थित देव प्रयागमे मिलैत अछि आ एतयसँ ई सम्मिलित जल-धारा गङ्गा नदीक नामसँ अगाडी प्रवाहित होइत अछि । याह पाँच प्रयागसभक सम्मिलित रूपकें पञ्च प्रयाग कहल जाइत अछि । ई प्रकार २०० किलोमिटरक सकस पहाडी रस्ता तय करि गङ्गा नदी ऋषिकेश होइत पहिल बेर मैदानकें हरिद्वारमे स्पर्श करैत अछि ।

                                     

2. गङ्गाक मैदान

हरिद्वारसँ लगभग ८०० किलोमिटर मैदानी यात्रा करैत गढमुक्तेश्वर, सोरोन, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होइत गङ्गा इलाहाबाद प्रयाग पहुँचैत अछि । एतय एकर सङ्गम यमुना नदीसँ होइत अछि । ई सङ्गम स्थल हिन्दुसभक एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ छी । एकरा तीर्थराज प्रयाग सेहो कहल जाइत अछि । एकर बाद हिन्दू धर्मक प्रमुख मोक्षदायिनी नगरी काशी वाराणसीमे गङ्गा एक वक्र लैत अछि, जहि ठामसँ ई एतय उत्तरवाहिनी नामद्वारा चिनहल जाइत अछि । एतयसँ गङ्गा मीरजापुर, पटना, भागलपुर होइत पाकुर पहुँचैत अछि । एतय पहुँचैत पहुँचैत गङ्गामे बहुतेक सहायक नदीसभ, जना- सोन, गण्डक, घाघरा, कशी आदि मिल जाइत अछि । भागलपुरमे राजमहलक पहाडसभसँ ई दक्षिणवर्ती होइत अछि । पश्चिम बङ्गालक मुर्शिदाबाद जिलाक गिरिया नामक स्थान नजदिके गङ्गा नदी २ शाखासभमे विभाजित होइत अछि- भागीरथी आ पद्मे । भागीरथी नदी गिरियासँ दक्षिण तरफ बहैत अछि तँ पद्मे नदी दक्षिण-पूर्व तरफ बहैत फरक्का बाँध १९७४ निर्मितसँ होइत बंगलादेशमे प्रवेश करैत अछि । एतयसँ गङ्गाक डेल्टा भाग शुरू होइत अछि । मुर्शिदाबाद शहरसँ हुगली शहरधरि गङ्गाक नाम भागीरथी नदी तथा हुगली शहरसँ मुहानेधरि गङ्गाक नाम हुगली नदी अछि । गङ्गाक ई मैदान मूलत: एक भू-अभिनति खदहा छी जाकार निर्माण मुख्य रूपद्वारा हिमालय पर्वतमाला निर्माण प्रक्रियाक तेसर चरणमे लगभग ६-४ करोड वर्ष पहिने भेल विश्वास अछि । याह मैदानसभमे जलस्रोतक औसत गहिराई १,००० सँ २,००० मिटर अछि ।

गङ्गाक ई घाटीमे एकटा एहन सभ्यताक उद्भव आ विकास भेल जकर प्राचीन इतिहास अत्यन्त गौरवमयी आ वैभवशाली अछि ।

                                     
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  • Gangotri भ रतक उत तर खण डक उत तरक श ज ल क एक शहर आय नगर पञ च यत छ गङ ग नद आ भ ग रथ नद क क न रम अवस थ त ई एक पव त र ह न द शहर छ ई व हत ह म लयन
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  • प र कर त भ रत प रव श कर त अछ बबई नद बबई नद बबई नद बबई नद म रहल ग ह बबई नद ब ध बबई नद ब ध बबई नद ब ध बबई नद ब ध बबई नद ब ध बबई नद ब ध
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  • प रश स त प रद श दमन आ द वक दमनक एकट सहर आ नगर पर षद छ दमन सहरक दमन गङ ग नद द ई भ गम ब टन अछ पह ल भ गक न म न न - दमन न न क अर थ छ ट आ द सर
  • श र भ रत जन म: मई एक भ रत य र जन त ज ञ आर भ रतक जलश र त, नद व क स तथ गङ ग सफ ई मन त र छ ओ मध य प रद शक म ख यमन त र भ क र य कर च कल अछ
  • मह नन द नद एक नद छ ज भ रत य र ज य पश च म बङ ग ल, ब ह र आ ब गल द श भऽ प रव ह त ह इत अछ एकर दह न सह यक नद सभ, म च नद छ ज न प लक प र व स म
  • छ ई लगभग वर षक चक रम भ रतक च र नद प रय गर ज इल ह ब द गङ ग - यम न सरस वत नद सभक सङ गम हर द व र गङ ग न स क ग द वर आ उज ज न श प र
                                     

गङ्गा (देवी)

गङ्गा नदी गङ्गा कऽ पवित्र मानल जाइत अछि । हिन्दूसभद्वारा देवी रूपी ई नदीके पूजा कएल जाइत अछि कियाकी हिन्दू धर्मावलम्बीसभके विश्वास अछि कि एहिमे स्नान करैसँ सम्पूर्ण पाप धुलित भऽ जाइत अछि आ जीवन-मरणक चक्रसँ मुक्ति मिल जाइत अछि । तीर्थयात्री गङ्गाक जलमे अपन परिजनसभके अस्थिसभक विसर्जन करैक लेल लम्बा दूरीक यात्रा करैत अछि ताकि हुनकर प्रियजन सीधा स्वर्ग जाए । हरिद्वार, इलाहबाद आ वाराणसी जका हिन्दुसभक कयन पवित्र स्थान गङ्गा नदीक तट पर अवस्थित अछि ।

                                     

गङ्गोत्री

गङ्गोत्री भारतक उत्तराखण्डक उत्तरकाशी जिलाएक शहर आया नगर पञ्चायत छी । गङ्गा नदी आ भागिरथी नदीक किनारमे अवस्थित ई एक पवित्र हिन्दू शहर छी । ई वृहत हिमालयन शृङ्खलामे लगभग ३,१०० मिटर उचाईमे अवस्थित अछि । ई हिन्दूसभक चारि धाममे सँ एक छी । गङ्गोत्री गङ्गा नदीक उद्गम स्थान छी । ई स्थान उत्तरकाशीसँ १०० किलोमिटरक दूरी पर अवस्थित अछि । गङ्गा मैयाक मन्दिरक निर्माण गोरखा कमाण्डर अमर सिंह थापाद्वारा १८अम शताब्दीके शुरूआतमे कएल गेछल आ वर्तमानमे मन्दिरक पुननिर्माण जयपुरके राजघरानाद्वारा कएल गेछल ।