ⓘ कनकाई धाम कोटीहोम

                                     

ⓘ कनकाई धाम कोटीहोम

कन्काई धाम पूर्वाञ्चलक एकटा महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन क्षेत्र छी । ई धाम नेपालक झापा जिलाक करिव मध्ये भागमे परैवाला कनकाई नगरपालिकाक वार्ड नं ४ मे तथा प्रशिद्ध कन्काई नदी क पूर्वीय तटीय क्षेत्रमे अवस्थित अछि । कन्काई धामके कनकाई धाम, कोटीहोम, माइधाम, माई आदि नामसँ सेहो पुकारैत अछि ।

                                     

1. इतिहास

नेपालक विभिन्न धार्मिक महत्त्वक नदीसभ जहिना कन्काई नदीमे सेहो बहुत वर्ष पहिलेसँही स्थानीय हिन्दू धर्मावलम्वी भक्तजनसभद्वारा आस्थापूर्वक पूजा आराधना करै प्रचलन रहल आएल अछि । ई करलासँ अपन राखने मनोकांक्षा पुरा होएत अछि मान्यता जन विश्वास रहल आएल अछि । ई परिप्रेक्षमे नेपालक आध्यात्मिक जगतक चर्चित व्यक्तित्व तथा नेपालक राष्ट्रगुरु योगी नरहरिनाथ ज्यूक विशेष अगुवाइ तथा विभिन्न क्षेत्रक धार्मिक सन्त तथा समाजसेवीसभक सक्रियतामे विक्रम सम्बत २०४२ सालक पौष महिना भर एक महिनातक विश्वकल्याण कोटिहोम महायज्ञ ई क्षेत्रमे आयोजना केलक, तत्पस्चात् ई स्थानके कोटिहोम कहै लगल अछि आ पछा विकशित भेलावाद कनकाई धाम कहै चिनल लगल।

                                     

2. बिकास आ विस्तार

वि.स.२०४२ सालक महायज्ञ सम्पन्न भेल पश्चात ई स्थानमे महायज्ञ केने अग्निके बचाई राख्न ओही यज्ञ कुण्डके यथावत राख ओ स्थानमे शिवपान्चायन मन्दिरक निर्माण केने छल जुन मन्दिर हाल भब्य रुपमे पुन:निर्माण केएल वाद । साथ ओ स्थानमे योगी नरहरिनाथ अपने उद्घाटन करै एकटा संस्कृत विद्यालय समेत प्रारम्भ केने छलजे आई पर्यन्त संचालनमे रहल अछि। ई स्थानमे विभिन्न थर गोत्रीय वन्धु सस्था आ दातासभसँ धर्मशाला तथा मठ मन्दिरक निर्माण कार्यसभ होई लगल पछा कोटीहोम क्षेत्रके औपचारिक रुपमे धामक रुपमे विकशित करैके लेल वि.स.२०४७ सालमे समाजसेवी भक्त बहादुर खड्काक अध्यक्षतामे विधान बनाइ कन्काई धाम धार्मिक विकाश सस्था कोटीहोम छोटकरीमे कोटीहोम संस्था सहो कहैत अछि नामक सस्थाक विधिवत गठन करै दर्ता कएल गेल छल, ओही सस्थाक मातहतमे हालतक ई स्थानक विकास निर्माण सम्पादन, समन्वय, संचालन तथा संरक्षणक कार्यसभ होएत आएल अछि । कनकाई धाम कोटीहोम मे दर्जनौ मठ, मन्दिर, धर्मशाला, पाटी पौवा, निर्मित तथा निर्माणाधीन अछि विभिन्न धर्म सम्प्रदायसभ जहिना: बौद्ध मार्गिक गुम्वा, निम्वार्ग, कबिर, प्रणामी, साइराम, आर्य समाज आदिक अपन-अपन अश्रमसभ आ विभिन्न थर गोत्रीय बन्धु सस्थाक अ-अपन मन्दिर तथा धर्मशालासभ सेहो रहल अछि । ई ठाउँक प्रसिद्ध तथा मूल मन्दिरक रुपमे कोटीयज्ञेश्वर शिव पान्चायन मन्दिर छोटकरीमे कोटीहोम मन्दिर के मानैत अछि । ई अलावा ई स्थानमे अथिति आवास तथा कार्यक्रम करै बनाएल कुछ बहु उद्देश्यिय सामुदायिक भवन आ फुलवारी उद्यान वाटिका सेहो निर्माणक क्रममे अछि ।

                                     

3. दर्शनार्थी तथा पर्यटकक आवागमन आ महत्व

कनकाई धाम कोटिहोममे बार्षिक पाच लाख भक्त, दर्शनार्थी तथा पर्यटक आवैत अछि सस्थाक रेकर्डसँ देखैत अछि। नेपालक पूर्वीय क्षेत्रक अलावा पूर्वोत्तर भारतक दार्जीलिंग, सिक्किम, पश्चिम बङ्गाल आ आसामक भक्त दर्शनार्थीसभ समेअत आवैत् अछि । विशेष करै अत लोगसभ पूजा आजा, बिबाह, ब्रतबंध,पुराण आदि धार्मिक कार्य करैके साथै दैनिक ब्याबहरिक जीवनक अस्त ब्यस्तता शहरी कोलाहलपूर्ण वातावरणसँ मुक्ति पाउन घुम्नक लेल आवैत अछि । यद्धपी झापा मोरंग जिलाक मृतकसभक अन्तिम सस्कार कनकाई नदीके हि सवसँ पवित्र मानैत अछि । ई बाहेक ई स्थान नेपालमे सबसँ बेसी गोत्रीय सस्थासभ एकीकृत भेल धामक रुपमे सेहो चिनल जाएत अछि। इ अलावा योगी नरहरिनाथ नेपालमे लगाएने १०० सँ बसी कोटिहोम मध्ये इ तेर्हौ कोटिहोम छी आ महायज्ञ पश्चात् सबसँ बेसी विकसित भेल क्षेत्रक रुपमे ईधाम के पावल योगीजी जीवित होएतकल बताउने छल ।