ⓘ दोलखा जिला

                                     

ⓘ दोलखा जिला

दोलखा नेपालक मध्यमाञ्चल विकास क्षेत्र अन्तर्गत जनकपुर अञ्चलक उत्तरदिशामे अवस्थित एक पहाडी जिला छी । ई जिला नेपालक मानचित्रमा २७० २८" उत्तरसँ २८० ००" उत्तरी अक्षांश र ८५० ५०" पूर्वसँ ८६० ३२" पूर्वी देशान्तरसँ फैलल अछि। कूल २१९१ वर्ग कि.मी. क्षेत्रफल भेल ई जिलाक पूर्वमे सोलुखुम्बु आ रामेछाप जिला, पश्चिममे सिन्धुपाल्चोक जिला, उत्तरमे चीनक स्वशासित क्षेत्र तिब्बत आ दक्षिणमे रामेछाप जिला पडैत अछि। नेपालक राजधानी काठमाडौंसँ १३३ कि. मी. पूर्वमे पडैवाला ई जिलाक सदरमुकाम चरिकोट छी । समुद्र सतहसँ ७६२ मी. उचाइसँ ७१३४ धरिक उचाईमे रहल ई जिलाक गौरीशंकर हिमालक आधार मानि नेपालक प्रमाणिक समय निर्धारण कएल गेल अछि।

२००७ साल पूर्व आ पश्चात २०१८ सालधरि सेहो पूर्व २ नं. गोश्वराक प्रशासनिक ईकाइक रूपमे रहल दोलखाक २०१८ सालसँ मात्र अलग जिलाक रूपमे अस्तित्वमे आएबतो सेहो २०२४ सालसँ मात्र अदालत, मालपोत, प्रहरी, हुलाक, स्वास्थ्य जेहन जिला स्तरीय कार्यालयसभ स्थापना होमए लगल अछि। ऐतिहासिक स्थल दोलखाक नामसँ नामाकरण कएल गेल ई जिलाक किछ स्थानसभमे किराँत वा लिच्छवीकालसँ ही बस्ती बसल गेल अनुमान अछि।

                                     

1. जिलाक नामाकरण

प्राचीन समयमे मुगलसभक अत्याचारमे पडि भारतवर्षसँ भागि आएल एक जोगी गौरीशंकर हिमालक काखमे एकटा गुफा भितर कोई नै देखे जका तपस्या करै लगल। हुनकर तपस्यासँ खुस भऽ भगवान शिवजी ओ जोगीक वरदान देलक। शिवजीक वरदान पावि खुस भऽ जोगी एकबेर सभदिशा चक्कर लगाक आवै छी कहिक चलि गेल। ओ जतय घुमैत छल बादमे ओही ठाममे पहुँचैत् छल। एवं रीतसँ दुई लाख बेर चक्कर लगाएतो कतौ नै पुग्ऽ सकल कहिक पहिने स्वयम् जतय तपस्या केनए छल ओही गुफामे आवि बसोवास करै लगल। एना दुई लाख बेर घुमएतो सेहो ओही स्थानमे आवि गेलासँ ओ स्थानक दो+लाखसँ अपभ्रंस होएत दोलखा नाम रहल जनश्रुति पवैत अछि।

वि.सं. सातम् शताब्दीमे भारतक बिहार लगायत उत्तरी क्षेत्रक तिब्बतसंगक व्यापार दोलखाक रास्तासँ होएत छल । ई मार्ग खुलाक दोलखाक "वनगढ"क रूपमे विकसित कएल गेल। उक्त वनगढमे काठमाडौं उपत्यकासँ ७०० नेवार परिवार बोलाक ओही ठाममे बसावल गेल। कहल जाइत अछि, ओ समय ई वनगढक कुथरे अधिकरणसँ वार्षिक २ लाख प्राप्त होएत छल आ एकर नाम दुईलाखा रहि गलाक बाद दोलाखा होएत दोलखा रहैल पहुँचल कहिक भनाई सेहो अछि। कुथुरे अड्डा संभवत हालक नागदह नजदीकक कुर्थेवेसी वा कुथलीमे रहल छल। कुथुरे अर्थात् लिच्छविकालमे कर उठावेवाला अड्डाक नाम छल।

तिब्बती भाषा अनुसार "दो" कऽ अर्थ पत्थर आ "ल" कऽ अर्थ मन्दिर आ "खा" कऽ अर्थ घर भेलासँ ई जिलामे प्रशस्त मात्रामे पत्थरसँ बनाएल मन्दिर आ घरसभ भेलासँ दोलखा नामाकरण भेल अछि कहिक सेहो कहनाई अछि।

                                     
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